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राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला सहयोग, बैंगन की उन्नत खेती से चैतू की बढ़ी आमदनी

महासमुंद । 01 अक्टूबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के दौरान किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में अनेक प्रयास किए गए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सेवा-संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी फसलों के विस्तार और किसानों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखण्ड के ग्राम बेलडीह के किसान श्री चैतू चक्रधारी ने इन प्रयासों का लाभ उठाते हुए पारंपरिक धान की खेती से उद्यानिकी फसल की ओर कदम बढ़ाया है।

किसान श्री चैतू चक्रधारी बताते हैं कि पहले वे अपने 0.60 हेक्टेयर कृषि रकबे में मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। धान की खेती में अपेक्षाकृत अधिक लागत आने और उसके अनुरूप आमदनी नहीं होने के कारण उन्होंने खेती के वैकल्पिक एवं लाभकारी विकल्पों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और सब्जी उत्पादन की आधुनिक तकनीकों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। विभागीय मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने बैंगन की खेती को अपनाने का निर्णय लिया।

श्री चैतू चक्रधारी ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार घटक का लाभ लेते हुए 0.60 हेक्टेयर क्षेत्र में बैंगन की फसल लगाई। खेती में उन्होंने ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग तकनीक को अपनाया। आधुनिक एवं उन्नत पद्धति से की गई बैंगन की खेती ने उन्हें पारंपरिक धान की खेती की तुलना में बेहतर आय का अवसर प्रदान किया। योजना के अंतर्गत बैंगन फसल एवं मल्चिंग के लिए उन्हें नियमानुसार 23,800 का अनुदान डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में प्राप्त हुआ।

श्री चक्रधारी बताते हैं कि बैंगन की खेती में लगभग 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त हुआ। बैंगन का विक्रय मूल्य लगभग 15 से 31 प्रति किलोग्राम तक प्राप्त हुआ। जिससे लगभग 3.25 लाख रुपये लाभ प्राप्त हुआ। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के प्रयोग से फसल प्रबंधन में भी सुविधा मिली। इससे उन्हें सिंचाई एवं खेत प्रबंधन में आधुनिक पद्धति अपनाने का अनुभव प्राप्त हुआ। बैंगन की फसल से प्राप्त बेहतर आमदनी ने श्री चैतू चक्रधारी का खेती के प्रति विश्वास बढ़ाया है और वे अब उद्यानिकी फसलों को कृषि आय का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं।

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