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मादा वत्सपालन योजना से मिली उन्नत नस्ल की बछिया से बढ़ी समृद्धि की उम्मीद

महासमुंद । 01 अक्टूबर 2026/ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन केवल आय का साधन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार है। महासमुंद जिले के बसना विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम रसोड़ा निवासी श्री रोहित साहू की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है। पशुधन विकास विभाग की मादा वत्सपालन योजना से जुड़कर उनके परिवार ने उन्नत नस्ल की मादा बछिया को बेहतर तरीके से तैयार किया, जो अब सफल गर्भाधारण कर चुकी है और वर्तमान में लगभग 4 से 5 माह की गाभिन है।

वर्ष 2025-26 में मादा वत्सपालन योजना के अंतर्गत श्री रोहित साहू को उन्नत नस्ल की मादा वत्स को भविष्य में दुधारू पशु के रूप में तैयार करने के उद्देश्य से दो किश्तों में कुल 19,500 का पशु आहार प्रदान किया गया। योजना से मिलने वाली सहायता का उपयोग बछिया के समुचित पोषण एवं विकास के लिए किया गया। उचित पोषण के परिणामस्वरूप बछिया स्वस्थ रूप से विकसित हुई और अब सफल गर्भाधारण कर चुकी है।
श्री रोहित साहू बताते हैं कि मादा वत्सपालन योजना के माध्यम से मिली सहायता ने पशुपालन को अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाने में मदद की। वर्तमान में बछिया लगभग 4 से 5 माह की गाभिन है। चूंकि यह उन्नत नस्ल की जर्सी क्रॉस बछिया है, इसलिए ब्याने के बाद इससे लगभग 10 से 15 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन की संभावना है। इससे भविष्य में लगभग 12 हजार से 15 हजार रुपए प्रतिमाह अतिरिक्त आय प्राप्त होने की उम्मीद है। पशुओं की देखभाल, चारा-पानी की व्यवस्था और दुग्ध उत्पादन जैसे कार्यों में महिलाएं सक्रिय रूप से भागीदारी निभाती हैं। ऐसे में इस उन्नत नस्ल की बछिया के दुधारू पशु बनने के बाद परिवार के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिसका सीधा लाभ घर की महिलाओं को भी मिलेगा।

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